एक दिन पहले तक आलू किसान के दोनों हाथों में लड्डू थे. आलू के बाज़ार रेट और लागत में बड़े अंतर के चलते ज़्यादा मुनाफे की उम्मीद दिखाई दे रही थी. बीते कई साल को देखते हुए पैदावार भी अच्छी हुई थी. लेकिन 5 मार्च को हुई बारिश और ओलों ने किसान के ख्वाबों पर पानी फेर दिया. खेतों में पानी भर गया है, जिसके चलते आलू के सड़ने का खतरा बढ़ गया है. जो आलू सड़ेगा नहीं वो काला पड़ जाएगा. उसके दाम कम हो जाएंगे.
लागत मिलना भी मुश्किल हो जाएगा. यूपी और पंजाब में ज़्यादा नुकसान होना बताया जा रहा है.
वहीं पर किसानो ने बताया कि 30 से 35 करोड पैकेट आलू का उत्पादन होता है. गौरतलब रहे कि एक पैकेट का वजन 50 किलो का होता है. इसमे से सबसे ज़्यादा आलू का उत्पादन आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, अलीगढ़, कन्नौज और फर्रुखाबाद में होता है. इसमे से 25 करोड़ पैकेट कोल्ड स्टोरेज में रख दिया जाता है. जो धीरे-धीरे बाज़ार में सप्लाई होता है. बाकी का 5 से 10 करोड़ पैकेट खेतों से सीधे बाज़ार में बेच दिया जाता है.