दिवाली के बाद मंडियों में गेहूं भाव सुधरने की संभावना, सभी क्षेत्रों में स्थिरता जारी

गेहूं के थोक कारोबार में दिवाली की मांग का कहीं भी जोर नहीं दिखाई दे रहा है। देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों की मंडियों में गेहूं पिछले भाव पर बिका। व्यापारियों का कहना है कि दिवाली की मांग इस साल बहुत जल्दी खत्म हो गई। अब दिवाली तक कहीं तेजी की उम्मीद नहीं है। हालांकि अगले माह यानि मध्य नवंबर में मंडी आवक घटने से गेहूं में मजबूती बन सकती है।


बरेली सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मांग की सुस्ती के चलते गेहूं पिछले भाव पर बिका। मंगलवार को इस क्षेत्र में गेहूं 10 रुपये घटकर बिका था। बरेली में मिल पहुंच गेहूं 2040-2050 रुपये प्रति क्विंटल पर बोला जा रहा है। उधर, कानपुर सहित ईस्ट यूपी की मंडियों में भी गेहूं के भाव पिछले स्तर पर रहे। इस साल गेहूं की दिवाली मांग जल्दी पूरी हो गई क्योंकि मिलों ने मांग की अनिश्चितता बनी हुई है। व्यापारियों का कहना है कि अनिश्चितता का माहौल होने से मिलें सीमित मात्रा में ही गेहूं खरीद कर रही हैं।

दिल्ली में गेहूं 2120-2140 रुपये प्रति क्विंटल (मिल पहुंच) पर स्थिर रहा। दिल्ली की मंडियों में गेहूं की आवक घटने के बावजूद भाव में कोई मजबूती नहीं आई। इससे सेंटीमेंट की कमजोरी झलकती है। दिल्ली में आज लारेंस रोड पर आवक 4400 बोरी (50 किलो प्रति बोरी) की रही। दिल्ली की सभी मंडियों और डायरेक्ट मिलों और चक्की वालों की सप्लाई जोड़कर दिल्ली में आवक 12-15 हजार बोरी होने का अनुमान है। इंदौर और मध्य प्रदेश की दूसरी मंडियों में भी भाव अपरिवर्तित रहे।

बिहार में भी गेहूं 1990-2000 रुपये प्रति क्विंटल पर पूर्ववत बिका। जबकि व्यापारियों और स्टॉकिस्टों का वेयरहाउस में रखा गेहूं भी स्थिर रहा।

राजस्थान की मंडियों में भी गेहूं के भाव अपरिवर्तित रहे। हाड़ौती क्षेत्र में गेहूं की आवक घटकर 4000 बोरी (प्रति बोरी 100 किलो) की रही। पूरे राजस्थान में गेहूं की आवक 8-10 हजार बोरी के आसपास रहने का अनुमान है। सभी क्षेत्रों के व्यापारियों का कहना है कि दिवाली के बाद मंडियों में गेहूं की आवक और घट सकती है क्योंकि किसानों के पास माल बहुत कम है। इसलिए गेहूं में तेजी का रुख बनेगा। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) का सस्ते भाव का माल खत्म होने पर ऊंचे भाव का माल आएगा तो बाजार में गेहूं को मजबूती मिलेगी।